May 30, 2013

Holi special

दरवाजे पर चारों खड़े थे
मैं बाहर जाने से कतरा रहा था
वो अंदर आने पर अमादा थे

ये तो तय था
जो लास्ट में रंगा जायेगा
उसकी हालत खराब है

बाहर से सुरेन्द्र बोला
"कितना छुपेगा, बचेगा नहीं"
गोपाल बोला
"छोड़ न यार डरपोक है साला"
राजेश बाकी के तीनों को लेकर
निकल गया था शायद

आधे घंटे तक इंतज़ार किया
आखिर में भी बाथरूम में
कब तक छिपता

घुटन से बाहर निकला
बाहें फैलाकर चैन की साँस ली

तभी रमेश मुझ पर झपटा
सिल्वर कलर में
कमीनों को पहचान नहीं पा रहा था

उस दिन बहुत रंग रगड़ा सालों ने

इस बार गाँव आया हूँ
बाथरूम में घुसा
बाहर निकलने का डर नहीं था

मोहल्ले के बच्चे एंग्री बर्ड की पिचकारियों से
एक दूजे पर पानी छिड़क रहे थे

कुछ देर बाद सुरेंद्र का एसएमएस आया
"wish you and your family happy holi."

होली कितनी फीकी हो गयी न यार
खैर छोड़ो दो दिन बाद काम पर जाना है....
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