Sep 23, 2011

बात खुद-ब-खुद बन जाएगी

शाम होने दो ज़रा
बात खुद-ब-खुद बन जाएगी....
जब आसमान ओढ़ लेगा
हल्की लाल चादर,
जब सूरज प्याली में डूब जाएगा
समंदर की,
जब हवाओं में नशा उतरने लगेगा,
बात खुद-ब-खुद बन जाएगी....
इन्हीं पलों में दुनिया मुस्कुराती हैं
दफ़्तर से घर जाने की ख़ुशी में,
अपनों के घर आने की ख़ुशी में..
होंसले सारे टूटने लगते हैं,
रूठने- मनाने के..
तुम भी मुस्कुरा देना
बात खुद-ब-खुद बन जाएगी
क्योंकि
शाम की दहलीज पर,
गुस्से की एंट्री नहीं होती हैं...
23-Sep-2011, 00:58 AM
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