हां मैंने नहीं पढ़ी है
साहित्यों की मोटी-मोटी पोथियाँ
अपने बर्ताव के कारण
मुझे कॉलेज से निकाला गया
मुझे बेमानी लगती थी
जायसी की मोटी किताब
और प्रयोजन मूलक हिंदी
सातवीं कक्षा के चारण कवि
और तीसरी कक्षा के ईदगाह ने
मुझे बदल दिया था
मैं नहीं पढ़ सका राग दरबारी
क्योंकि परसाई जी के आगे सोचना
बस में नहीं था मेरे
मैं नहीं जाता हूँ काव्य सभाओं में
जहाँ हर एक कवि
सिर्फ सुनाने की ताक में रहता है
मेरी रचनाओं में नीरसता है
क्योंकि किसी रस को पीया नहीं मैंने
मैं खुद से बाहर होकर नहीं लिखता
क्योंकि आडम्बर से जीया नहीं मैंने
मैं कवि नहीं हूँ
मैं सिर्फ अपनी बात लिखता हूँ
#damukipoem