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Jun 7, 2011

एज इट इज




 
भ्रष्टाचार, आमरण अनशन
आंदोलन, काला धन
 
राम लीला मैदान
ये शैतान, वो बेईमान
 
सरकार, मुलाकात
नही बनी बात
 
पुलिस का डंडा
राजनैतिक हथकंडा
 
लोगों का विरोध
बाबा का प्रतिशोध
 
चैनल-ओ-अखबार
आरोपों का अत्याचार
 
हाई प्रोफाइल उपोषण
बच्चों में कुपोषण
 
उफ्फ...
इन मुद्दों के पत्थरों को
क्यों उछल रहे हो मेरी खिडकियों पर
जब रहना ही है सबको
"एज इट इज"

Jul 10, 2010

"ऑक्टोपस पॉल का साक्षात्कार"

रवीवार का दिन वैसे भी सुस्ताने का दिन होता हैं, उस दिन बिस्तर पर पड़े-पड़े मैं न्यूज़ चैनलों को बदल बदल कर देख रहा था. एक चैनल पर दो विंडो में कुछ अजीब सा नज़ारा था, एक विंडो में एंकर थी और दूसरे पर कोई अजीब सा जानवर दिखाया जा रहा था. मेरी निगाह उसी चैनल पर टिक गयी.
एंकर ने पूछा "पॉल आपका डेली रूटीन क्या हैं ज़रा हमारे दर्शको को बतायेगे..?"    
    
एक मिनट के लिए तो मैं पॉल नाम के इस शख्स को स्क्रीन पर ढूंढ रहा था, फिर मुझे याद आया अरे! ये तो वही महान ऑक्टोपस पॉल हैं जिन्होंने FIFA World Cup के नतीजो में अहम् भूमिका निभाई थी! बड़ा Interesting interview हो रहा था. मुझे पॉल के उत्तर की प्रतीक्षा थी. अब कैमरा किसी इंसान पर केन्द्रित था शायद वो पॉल का प्रवक्ता था. मेरे दिमाग में सीधे एक Question आया. इस प्रवक्ता की तनख्वाह कितनी होगी? पॉल इसे चेक देता होगा या फिर केश? चेक देता होगा तो हस्ताक्षर कैसे करता होगा? 
      
प्रवक्ता "जी पॉल सर को साइनस का problem हैं, हर वक़्त पानी में रहने की वजह से, इसलिए सुबह-सुबह कपाल- भाति करने के बाद TV पर २ घंटे तक सारी International खबरे देखते हैं. आपको बता दूँ की पॉल सर शुद्ध शाकाहारी हैं, नाश्ते में इन्हें हमेशा समुद्री घास का ज्यूस लेना पसंद करते हैं ! फिश टैंक का पानी बदलने के बाद पॉल सर को ऑफिस ले जाया जाता हैं "

एंकर रोकते हुए "ऑक्टोपस पॉल travel कैसे करते हैं, कोई सुरक्षा के ख़ास इल्तेज़मात ?"


ये कैसा सवाल हैं खैर हिंदी न्यूज़ चैनल का तो यही सवाल होता हैं.

प्रवक्ता "जी हमारी सरकार ने पॉल सर को ZED Security दी हैं. वैसे कभी कभी इसकी वजह से पॉल सर को Privacy नहीं मिल पाती हैं लेकिन क्या करे सुरक्षा का सवाल हैं"

स्क्रीन पर नीचे टिकर चल रहा था. "दंतेवाडा में एक और नक्सली हमला इस बार स्थानीय लोग बने निशाना, 60 की मौत". ये ब्रेकिंग न्यूज़ थी लेकिन ऑक्टोपस पॉल की TRP शायद ज्यादा थी, Interview जारी था. मैंने साचो ब्रेक के दौरान चाय बनाऊंगा लेकिन 8 मिनट से तो एक भी ब्रेक नहीं हुआ. 

 एंकर "बोलीवुड में से अगर आपको कटरीना और करीना में से किसी एक को चुनना हो तो आप किसे चुनेंगे?"

फिश टैंक में पॉल के सामने कटरीना और करीना की तस्वीरे उतारी जा रही थी. बड़ा बेहूदा सवाल था लेकिन पॉल की पसंद जानने के लिए मैं भी बेकरार था. अब पॉल साहब किस पर बैठेंगे?  ऑक्टोपस पॉल एक फिश टैंक में बीचो बीच रखी कटरीना और करीना की तस्वीरो की तरफ तैरने लगे. मेरे ख्याल से शायद उनकी पसंद  कटरीना होंगी, लेकिन करीना भी शुद्ध शाकाहारी हैं शायद पॉल साहब करीना को पसंद कर ले.

       लेकिन दृश्य कुछ अलग था. पॉल  बाबा की चार भुजाये कटरीना पर थी और चार भुजाये करीना पर. मैं समझ गया, ऑक्टोपस एक दिल फेंक किस्म का प्राणी होता हैं.शायद कल के अखबारों की सुर्ख़ियों होगी "करीना ने पॉल के लिए सैफ को छोड़ा" या फिर "कटरीना भी चाहती हैं पॉल को". एंकर मुस्कुरा रही थी, पॉल के प्रवक्ता भी.एंकर के बेहुदा सवालो की वजह से मुझे चैनल बदलना पड़ा. दुसरे न्यूज़ चैनल पर भी पॉल ही थे...

  आइये अब आपको दिखाते हैं ऑक्टोपस पॉल से हुए हमारे संवाददाता दीपक की बातचीत के कुछ ख़ास अंश. उधर दीपक हँसते हुए  "मिस्टर फ्रँकलिन (पॉल के प्रवक्ता) क्या पॉल को वाकई जर्मन नागरीको से खतरा हैं, जिस तरहा फुटबाल सेमी फाइनल्स में जर्मन टीम के बाहर हो जाने के बाद खबरे आ रही थी?"

सवाल अच्छा था. मैं सोच रहा था की पॉल जैसे जानवर को भी सच बोलने की सजा भुगतनी पड़ रही हैं तो फिर हम किस खेत की मुली हैं. ऑक्टोपस पॉल दुब्बक कर फिश टैंक के कौने में चला गया था. इसी बीच एक ब्रेकिंग न्यूज़ आ रही थी. कुर्ला का सीरियल किलर पकड़ा गया ज्यादा जानकारी के लिए टेलेफोन पर मौजूद हैं हमारे संवाददाता मयंक. मोबाईल के इस दौर में मयंक अभी तक टेलेफोन से ही बात कर रहा था.

  मेरे मन में भी कई सवाल कोंध रहे थे जो में पॉल से पूछना चाहता था. मसलन महंगाई का मुद्दा,  2011क्रिकेट विश्वकप विजेता कौन होगा? NDA और UPA में से कम भ्रष्ट सरकार कौनसी रहेगी? बिहार चुनावो का नतीजा क्या होगा? भारत-पाक रिश्ते सुधरेंगे या नहीं? आरक्षण, गरीबी, Honour killing और पता नहीं कितनी सारी बातें. दिल में एक बात और भी हैं जो शायद में कभी पॉल से पूछ पाऊं. "हिंदी न्यूज़ चैनल का कंटेंट बदलेगा या नहीं?"

    मुझे मेरे दिल्ली Assignment से Call आया. वर्सोवा में और एक मॉडल ने सुसाइड कर लिया हैं एक बार ज़रा check कर लो. मेरा रवीवार मॉडल के भेंट चढ़ गया था. 

  


   

Apr 24, 2010

अंतराल.....


अब ज़िन्दगी में भी, अंतराल होने लगे है..

योग के साथ, वो मुझे जगाएगी..
ब्रेक फास्ट न्यूज़ में, चाय पिलाएगी..
"जायका इंडिया का" के वक़्त, लंच बनेगा..
दोपहर की "शान्ति" में, बच्चे स्कूल से लौटेंगे..
"अलिफ़-लैला" के वक़्त, दरवाजा खुलेगा..
"बालिका-वधु" आएगी, तब खाना बनाएगी..

"कहानी घर घर की" के वक़्त, बच्चे सो जायेंगे..
"दिल मिल गए" के बाद, हम बेडरूम में जायेंगे..
"दादीसा" की कुछ बातें होगी

उसके बाद.... आदतन वो कहेगी..

"टीवी ऑफ कर दो, सुबह जल्दी उठाना है"

Mar 27, 2010

इक्तेफाकन उस रोज़


इक्तेफाकन उस रोज़
ठण्ड बढ़ गयी थी..
इक्तेफाकन तुम भी
दुपट्टे में लिपट कर
घर से चली थी...

हुआ यूँ था,
की कुछ रोज़ पहले,
स्कूल में तुम नयी-नयी आई थी...

फरवरी की सर्दी,
ओर दुपट्टे वाली शबनम..
खूब चर्चे हुए थे,
क्लास रूम की मेज़ पे बैठकर...
सब तेरी आँखों का कमाल था..
पता नहीं गुलाबी चेहरे के दीदार में
कितने पन्नो पर तेरी शक्ल बनी होगी,
पता नहीं...!!!

सर्द हवाए तुझे छुकर,
मुझ तक आती,
तेरे केश में लगे... 
आंवले की खुशबू से महक उठता,
मैं भी और क्लास भी...

चलते-चलते,
इक्तेफाकन तेरा दुपट्टा छिटक गया..
गुलाब के पौधे में अटक गया..
 
इक्तेफाकन उस रोज़,
थोड़ी धुप हो रही थी..
इक्तेफाकन शबनम,
मुझे देख रही थी...

इक्तेफाकन फरवरी थी..
इक्तेफाकन तरीक भी 14 थी..

इफ्तेफाकन दुपट्टे में उलझकर,
गुलाब टुटा था उस वक़्त...

इक्तेफाकन मेरी ओर गिर पड़ा था..
इक्तेफाकन मैं सामने खड़ा था..
 
बस इक्तेफाकन प्यार हो गया था.....

आजकल



क्यों आजकल देर से नींद आती हैं...
क्यों अजीब बातों पर वो मुस्कुराती हैं...
आजकल वो दुआए भी करने लगी हैं...
कुछ कह दो तो शर्माती हैं...
पता है, उसे यकीन नहीं होता...
की शायद उसे प्यार हुआ हैं....

कहने को तो घंटो लाइब्ररी में रहती हैं...
मगर किताबें उलटी पकड़ कर, जाने कौनसा सबक याद कराती होगी...
कॉफ़ी का शरबत हो जाता हैं..
फिर भी फूँक मारती रहती हैं..
कोई कितना रोके, कितना टोके...
उलझी रहती हैं...
पता हैं, उसे यकीन नहीं होता...
की शायद उसे प्यार हुआ हैं...

चलते-चलते बच्चो से शरारत करना...
लम्बी आहे भरना... जुल्फों से हरकत करना..
पीछे मुड़ कर, मुस्कुराकर धीरे से बाय कहना..
रोमांटिक नगमों की धुनों पर, सुर से सुर मिलाना...
कोई कितना रोके, कितना टोके...
सुनती ही नहीं हैं..
पता हैं, उसे यकीन नहीं होता हैं..
की शायद उसे प्यार हुआ हैं...

एक मैं हूँ की उसे देखता रहता हूँ..
कुछ लिख कर, कागजों को, पानी में फेंकता रहता हूँ...
आजकल सूरज से दिन नहीं निकलता हैं मेरा..
घंटो नाखुनो को, दांतों से, कुरेदता रहता हूँ...
कोई कितना रोके, कितना टोके..
मुझे कुछ पता नहीं..

पता हैं, उसे यकीन नहीं होता हैं...
की शायद मुझे प्यार हुआ हैं.....

Nov 5, 2008

पहला प्यार..

हर बार कोई जब मिलता है,
तेरी बात छेड़ता हैं मुझसे..
हर बार यही सोचता हूँ मैं, की...
चलो भूल कर देखे..

घर से निकलना मुश्किल हैं..
गलियों से गुज़ारना मुश्किल हैं,
वो खिड़की अब भी वहीँ है क्या?
ओह..!!  चलो भूल कर देखे...

कॉलेज के गेट पर जब भी कोई..
छुप-छुप के सीटी बजाता हैं..
वो मेरी याद दिलाता हैं..
उफ़...!! चलो भूल कर देखे...

कोई पलट-पलट के देखता है..
उंगली में लटे लपेटता हैं..
जी छूने को ललचाता है..
ना..!!  चलो भूल कर देखे..

इस रात को कैसे भूलूं मैं..
उस बात को कैसे भूलूं मैं..
जब चाँद को खूब जलाया था..
छोडो..!!  चलो भूल कर देखे..

ये दिल, आँखे, सांसे सब कुछ..
तेरे नाम से हरकत करती थी..
अब नाम-ओ-निशाँ नहीं है तेरा..
आह..!!  चलो भूल कर देखे.....

Jun 3, 2008

सन-डे मस्ती..



जी चाहता हैं चाँद तोड़ लाऊं..
सूरज को निम्बू पानी पिलाऊं..
बादल पर तालाब बनावाऊं..
आहा! ख्याल तो बुरा नहीं..

आसमान में एक ब्रिज बनाऊं..
उसपे हरी-भरी सी बेल सजाऊं..
फिर एरोप्लेन को कम्पनी दूंगा..
अरे! ख्याल तो बुरा नहीं...

जयपुर-चेन्नई पास में कर दूँ..
चाहे जिसकी झोली भर दूँ..
भेंस को मेरी पिज्जा खिलाऊं..
वैसे! ख्याल तो बुरा नहीं..

हूर-परी सी दुल्हन होगी..
लाइफ मेरी एकदम फन होगी..
वीनस पर हनीमून रचाऊं...
ओ हो! ख्याल तो बुरा नहीं...

मेरे पास एक ऐसी छड़ी हो...
मैजिक मे जिसके शक्ती बड़ी हो...
नेताओं के सर पे घुमाऊं...
भाई! ख्याल तो बुरा नहीं..

मंगल वाकिंग डिस्टेंस पे होगा..
इंडियन ओशियन वहाँ शिफ्ट होगा..
और ऑक्सीजन के प्लांट लगाऊं..
क्यों! ख्याल तो बुरा नहीं...

चाँद डूबा और सूरज निकला..
रात का अजीब ख्वाब भी पिघला..
सन-डे हें फिर से सो जाऊं..
अरे हाँ ! ख्याल तो बुरा नहीं..


कभी कभी सन-डे के दिन देर तक सोना अच्छा लगता हैं...में अक्सर जागने के बाद भी घंटो तक बिस्तर पर पडा रहता हूँ....और फिर एक ख्याल मुझे कहाँ ले जाता हैं...... उसका नतीजा आपके सामने हैं....  क्यों! ख्याल तो बुरा नहीं...

May 21, 2008

मानसून..


भभाकता सूरज, तेज़ हवाए...
सूखी धरती और मरते लोग...
सब कुछ तो ठीक था...हर साल यही तो होता हैं...

लेकिन स्कूल से लौटी छूटकी ने
थैला रखकर आँगन मे....
जाने कौनसा गीत गाने लगी...
जोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी...
कि मानसून आने वाला हैं...
भाई मानसून आने वाला हैं....

सत्तर पार की संतो काकी
बैचेन होकर चारपाई से उतरी..
उछलती छुटकी का हाथ दबोचा
लकडी से डराकर कहने लगी..
"मुई पेट भरने को दाना नहीं..
पानी का भी ठिकाना नहीं
घर की इस बिगडी हालत मे
किसको न्यौता दे आई"
कि मानसून आने वाला हैं...
भाई मानसून आने वाला हैं....

छुटकी ने, काकी से, हाथ छुड़ाकर
भागी सरपट, दुम दबाकर..
गोद मे जाकर अपनी माँ को
हस-हसके समझा ने लगी
फिर दोनों उठकर बीच आँगन मे
झूम झूम के गाने लगी...
कि मानसून आने वाला हैं...
भाई मानसून आने वाला हैं....

लछमन चाचा घर पर आया
उसको भी सबने समझाया....
छप्पर को फ़िर नया बनाओ...
सूखे होज़ को साफ कराओ...
इस बार ये पानी बह ना जाए
छुटकी गौर से बात बताने लगी....
कि मानसून आने वाला हैं...
भाई मानसून आने वाला हैं....

अब धरती पर हरियाली होगी!
गायों की बात निराली होगी...
मिलेगा उनको ढेर सा चारा
फिर बदलेगा वक्त हमारा...
देख आसमा, लछमन चाचा...
मन ही मन मुस्काने लगे....
कि मानसून आने वाला हैं...
भाई मानसून आने वाला हैं....

अब संतो कि समझ मे आया....
दुआ में उसने हाथ उठाया
घर मे फिर खुशहाली लादे
राधा कि फिर से गोद भरादे....
गीले आँगन में खेलता मुन्ना
सोच-सोच, इतराने लगी....
बूढी आँख से छलका आंसू....
अब संतो काकी गाने लगी...
कि मानसून आने वाला हैं...
भाई मानसून आने वाला हैं...

* मैंने भी बचपन में अपने गाँव राजस्थान में थोडा सा वक़्त गुज़ारा था उस दौरान मुझे ये अहसास हुआ की वहाँ बरसात का क्या मोल हैं.. बस वही बाते मैंने आपके सामने कवीता के तौर पर रखी हैं.. उम्मीद हैं आपको ज़रूर पसंद आयी होगी.... plz comments..

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