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Nov 10, 2012

शुभ दीपावली


कतरा कतरा जीवन भर दें
आओ रोशन सब को कर दें
गली का बच्चा, सीधा सच्चा
अरमानों का उसको पर दें
दर्द चबाकर हसते जाए
खुदा ऐसा हमको हुनर दें
रत्ती रत्ती बांट सके सुख
ठंडी छांव से आंठों पहर दें
खुलके अपनी बात कर सके
मीरा को अब ना कोई ज़हर दें
मूह पर सीधी बात करे जो
मालिक ऐसा सबको जिगर दें

Mar 27, 2010

खोता बचपन

 
उठाने दो कूंची,
इसे आसमान में रंग भरने दो
इस ग़ज़ब से बचपन को
कोई उड़ान भरने दो..

काँच की गोलियां ठोकने दो,
इसे पानी पर छप्प-छप्प करने दो,
इस ग़ज़ब से बचपन को
कोई उड़ान भरने दो...

फाड़ने दो किताबो से पन्ने,
एक कल्पना उड़ेगी
या एक कश्ती बनेगी
दीवारों पर कलम चलेगी
तो कोई सूरत भी बनेगी..

ज़िन्दगी की तंग गलियों से,
इन्हें हँसते-हँसते गुजरने दो
इस ग़ज़ब से बचपन को
कोई उड़ान भरने दो....
 
थैलों के बोझ तले,
ये फुलवारियां क्यों दब गयी...
उम्मीदों के हथौड़े पड़ने से,
ये मुस्काने क्यों छिटक गयी
इन नन्हे-नन्हे तारों को,
रात का आँचल भरने दो
इस ग़ज़ब से बचपन को,
कोई उड़ान भरने दो...

Jul 2, 2008

माँ..

वो देख ना चाँद को, कितना चमकता हैं माँ.....
नीचे क्यों नहीं आता, क्या वो इतना डरता हैं माँ....

रोज़ रात को सपना आता हैं मुझे,
खुदा भी धरती पर उतरता हैं माँ...
तू जब भी मुँह खोलती हैं,
तब मुझसे वो बात करता हैं माँ....

ये आँखे क्यों भीग गयी तेरी,
क्यों आंसू पलकों पे ठहरता हैं माँ,
उधर देख वो चिडियों का घर,
वो चूजा कितना इतरता हैं माँ...

तू मुझे अकेला तो नहीं छोडेगी?
मेरा वक्त तुझ ही से गुज़रता हैं माँ....

*These are the expression of little 4-5 years boy so i crafted this poem according to their phsycology.

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