Mar 27, 2010

इंसान

 

कांटो पर चलाना काम मेरा,
धरती की गोद में सोता हूँ,
मैं तो दीवाना हूँ यारों,
बस अपनी मौज में रहता हूँ ...

रिश्ते-नातों में उलझा नही,
पूरी दुनिया से मेरा नाता हैं,
सब लगते मुझको अपने से,
मेरा मज़हब यही सिखाता हैं,  
संग रहने से क्या होगा,
मैं सबके दिलो में रहता हूँ
मैं तो दीवाना हूँ यारो,
बस अपनी मौज में रहता हूँ...

कभी उड़ता हूँ बादल बनकर,
कभी बूंदों में ढल जाता हूँ
ग़मों का साया जहाँ भी हों,
वहाँ खुशियाँ बनकर जाता हूँ..
छोटी-छोटी बातों में ,
कभी हँसता हूँ, कभी रोता हूँ..
मैं तो दीवाना हूँ यारो,
बस अपनी  मौज में रहता हूँ..

मुझसे न पूछो नाम मेरा,
सब दिल वाला मुझको कहते हे,
पेड़-पौधे, नदिया-बादल,
सब साथ में मेरे रहते हैं..
धरती को माँ कहने वाला,
अब बेटा मैं इकलौता हूँ..
मैं तो दीवाना हूँ यारो,
बस अपनी मौज में रहता हूँ....
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